बुधवार, 27 जुलाई 2011

सौदा ऐसा भी!

कई बार हम मध्यम वर्गीय लोग कुछ ऐसे निर्णय ले बैठते हैं की उसके दुष्परिणामों से वाकिफ नहींहोते हैंहमारी आँखों पर सिर्फ पैसे का इतना मोटा पर्दा होता है की और कुछ दिखाई ही नहीं देता है और अगर कोईदिखाने का प्रयास भी करे तो हमें लगता है की ये हमसे जलता हैइससे हमारी आने वाली सम्पन्नता देखी नहीं जारही है
आज हमारे एक कुछ दूर के रिश्तेदार स्वर्ग सिधार गएवह डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर थेदो बेटे औरएक बेटी के पिताबड़ा बेटा पढ़ाने में उतना तेज था तो उसको प्रभाव से किसी कॉलेज में लगवा दियादूसरा बेटाएम सी करके किसी कंपनी में नौकरी पा गयाउन्होंने सोच रखा था कि उसके पैदा होने से लेकर अपने शेष जीवनभर का खर्च इसकी शादी में ही वसूलना हैवैसे ये आम बात है कि हम मध्यमवर्गीय परिवारों में- मैंने भी इसकेलिए बहुत खाक छानी है अगर लड़की की योग्यता के अनुसार वर खोजना है तो काम से काम १५ लाख लड़के वालोंको दे जाइए फिर अपना देखिये क्या करना है? लेकिन मैं ऐसा सौभाग्य प्राप्त कर सकी कि इतना पैसा दहेज़ में देसकती और ही मेरे पास इतना पैसा हैफिर बेटियों की ही हिदायत थी कि अगर दहेज़ देकर ही शादी करनी थी तोहै स्कूल करवा कर कर देती सारा पैसा इकठ्ठा तो रहताअब तो पैसा पढ़ाई में भी लग गया
उनको एक बेटी वाला मिल ही गया , उसकी अकेली बेटी थी उसे घर जमाई चाहिए था उसने इनको२१ लाख रुपये दिए शादी के पहले ही और इन्होने बढ़िया बंगला बनवा लिया और आधुनिक सुविधायों से युक्त जीवनजीने लगेबेटा शादी के बाद जो गया तो फिर कभी बहन की शादी में ही आया
बहुत दिनों से बीमार चल रहे थे, बार बार बेटे को खबर जा रही थी कि पापा की इच्छा देखने की हैलेकिन उसको समय नहीं था उसके ससुर भी बीमार चल रहे थेफिर बेचीं हुई चीज पर अपना अधिकार नहीं रहजाता हैवह महीनों बीमार रहे लेकिन बेटे का मुँह देखने के लिए तरस गए और आख़िर बगैर मुँह देखे ही स्वर्गसिधार गएसारे रिश्तेदार लड़के के लिए थू थू कर रहे हैं कि ऐसा भी क्या की बाप के आखिरी समय भी नहीं सकाबाप बेटे की शक्ल देखने की हसरत लिए चला गया
इसमें दोष किसका है ? बेटे का या बाप काआपने अपने बेटे का सौदा किया - मुंहमांगी रकम ली औरऐश का जीवन जीने लगे ये भी नहीं पूछा की बेटा कहाँ है? और कैसा है? तब उसकी याद नहीं आई क्योंकि उनके पासमें एक बेटा था बहू थीये सौदा करने वाले ये भूल जाते हैं कि इस सौदे से बेटे को कभी कभी कितनी तकलीफहोती हैउससे बगैर पूछे आप ने बेच दिया और उसने आपकी इच्छा का सम्मान कियाकभी लड़कियाँ गाय बकरीकी तरह से भेज दी जाती थीं और वे चली जाती थी एक खूंटे से छूट कर दूसरे खूंटे पर बंधने के लिए . अब बेटे भीजाने लगे हैंबेटियों की सौदा नहीं होती थी लेकिन बेटे की खुले आम सौदा होती है
अगर हम कहें की अब दहेज़ कानून के कारण दहेज़ नहीं लिया जाता तो ये शत प्रतिशत गलत हैक्यानहीं लिया जाता है? लड़के वालों को फाइव स्टार होटल से शादी चाहिएगाड़ी भी चाहिए महँगी वालीलड़का अगरसरकारी नौकर है तो फिर तो ब्लैंक चैक है उसमें रकम भरने का हक़ उनका ही होता हैये हकीकत है इस समाज की
वह समाज जिसमें हम रहते हैंलोगों को दिखाने के लिए चाहिए कि इतना हमें मिला हैकितने प्रतिशत हैं जो दहेज़के नाम पर नहीं लेते हैं लेकिन इतर तरीकों से लेते हैंमेरी एक कलीग हैं , पतिदेव उनके आई आई टी में प्रोफेसर हैएक बेटा और एक बेटी दोनों इंजीनियरबेटी की शादी की तो आई आई टी के ही कम्युनिटी सेंटर से की जो किलगभग मुफ्त ही रहता हैसब कुछ बढ़िया कियालेकिन जब लड़के की शादी की तो कानपुर के बढ़िया होटल सेएंगेजमेंट की और शादी दूसरे होटल से क्योंकि खर्च तो लड़की वाले को ही करना था यद्यपि लड़की वाले भी मेरे हीपरिचित थे लेकिन बेटे और बेटी दोनों की शादी में प्रबुद्ध कहे जाने वाले लोग भी इस तरह से दोहरे प्रतिमान अपनातेहैंहम समझ नहीं पाते हैं कि हमारे दोहरे चेहरे क्या हमें कभी खुद को धिक्कारते नहीं हैअब भी हम ऐसी घटनाओंसे कोई सबक नहीं लेंगे

7 टिप्‍पणियां:

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

jis par biitatii hai wahii jaanataa hai.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सिक्षाप्रद आलेख!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

विचारणीय लेख ..

sushma 'आहुति' ने कहा…

सार्थक पोस्ट...

SAJAN.AAWARA ने कहा…

Ladki agar padhi likhi hai or samajhdaar hai to or kya chahiye ?
Pta nahi kab samjhenge log?

Jai hind jai bharat

वन्दना ने कहा…

यही विडंबना है जिसका हल हमारे पास ही है मगर दिखावे की प्रवृति ने ही इंसान की ये दुर्गत कीहै।

Udan Tashtari ने कहा…

क्या कहा जाये...विचारणीय...सार्थक लेखन!!