रविवार, 24 जुलाई 2011

ख़ुशी मिली इतनी .........

आदित्य, राहुल , कल्पना और मैं

कुछ खुशियाँ ऐसी होती हैं कि जिन्हें हम बयान नहीं कर सकते हैं। ऐसी ही ख़ुशी मिली मुझे भी १५ जुलाई को जबमेरी पुत्री सम कल्पना की सगाई हुई। वह धरोहर थी मेरे पास अपनी माँ जो आखिरी में वक़्त मुझसे कह कर गयी थीकि इसका ध्यान रखना मुझे इसकी बहुत चिंता है। तीन साल पहले अचानक उनको हार्ट अटैक पड़ा , सारी जानकारीमुझे थी कि उनके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर चुके थे लेकिन दिए की आखिरी लौ की तरह से वह शाम जबठीक लग रही थी. तब अपनी बेटी के बारे में चिंता व्यक्त कर गयी थी और फिर वह चली गयी। वह मेरी सहेली बाद मेंबनी थी पहले हमारे बच्चे साथ साथ पढ़े १५ साल का एक लम्बा अरसा होता है जब से साथ मिला साथ साथकोचिंग फिर एक ही संस्थान में चयन और होस्टल का एक ही कमरा। साथ साथ पढ़ाई और वहाँ से निकल कर भीआज तक साथ साथ रहना ऐसा साथ तो सगी बहनों को भी नहीं मिलता है और फिर इतनी अच्छी समझ।
जब नेट पर मैंने अपनी बेटी का प्रोफाइल डाला तो उसका भी साथ साथ डाला था। मैं ही सबसे बातचीत करती औरफिर उसके पिता को बता देती कि आप उनके घर जाकर बात करिए। तीन साल तक प्रयास किये लेकिन दोनों में सेकिसी के लिए सफलता नहीं मिली। पिछली दिसम्बर में जब मेरी बेटी की सगाई हुई तो लगा कि ये अकेली कैसेरहेगी? अचानक माँ के चले जाने का गम वह अगर सहन कर पाई थी तो अपनी सहेली के दम पर। फिर मैं माँ बनगयी। अपनी नौकरी के बाद जो उसने माँ के लिए करना चाहा था मेरे लिए करती रही। मेरी भी दोनों आँख का तारा हैं।
जैसे जैसे बेटी की शादी का समय पास रहा था लग रहा था कि कल्पना की भी कहीं हो जाये तो अच्छा है और मनकहता था कि इन दोनों का हर काम साथ साथ हुआ है तो शादी भी साथ साथ ही होगी।
कभी मजाक में दोनों कहती कि अगर पहले हममें से किसी की भी शादी हो गयी तो गौना तब तक नहीं किया जायेगाजब तक दूसरी की शादी नहीं हो जाती।
फिर अचानक वक्त ने पलटा खाया और सिर्फ १५ दिन के अन्दर देखने और सगाई तक का सफर तय हो गया।
मैं कितनी खुश और भार मुक्त हूँ इसका अहसास सिर्फ मैं ही कर सकती हूँ। मेरी दोनों बेटियों की शादी बस होने हीवाली है। सिर्फ मैंने ही किया ऐसा नहीं है। मैं नौकरी करती थी और उसकी माँ घर में रहती थी बच्चे सुबह कोचिंग केलिए निकलते और मुझे सख्त हिदायत थी कि ठंडा खाना बच्चे नहीं खायेंगे। जब कोचिंग का ब्रेक होता दोनों उसकेघर जाते और अम्मा गरम थाली तैयार रखती कि जल्दी से खाओ और फिर कोचिंग के लिए भागो। दो साल तकउन्होंने बच्चों के लिए बहुत किया और उसके तुलना में मैं कुछ भी कर पाऊं तो शायद उनके ऋण से उरिण होपाऊँगी।
बस तभी तो कह रही हूँ ख़ुशी मिली इतनी की मन में समाये।

15 टिप्‍पणियां:

ashish ने कहा…

आप धन्य है , हम आपकी ख़ुशी में शामिल है . हमारा आशीर्वाद बेटियों को .

anu ने कहा…

दीदी अपनी खुशियों को सबके साथ बांटने के लिए आभार....बेटियों को बहुत बहुत आशीष

anitakumar ने कहा…

दोनों बेटियों की सगाई के लिए बहुत बहुत बधाई। दोनों की शादी जल्द से जल्द और अच्छे ढंग से हो जाए।
आप जैसी सहेली मिलना भी तो मुश्किल है।

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

नहीं अनीता ऐसा नहीं है, वो भी बहुत अच्छी थी, सिर्फ मेरी बड़ी बेटी ही नहीं बल्कि छोटी बेटी जो की बीमार भी रहती थी कोचिंग करने के बीच में वही चली जाती थी क्योंकि उनकी हिदायत थी की बीच के समय में घर आकार खाना खाए और फिर आराम करके दूसरे क्लास में जाए.लेकिन ऐसे अच्छे लोग हमें जल्दी छोड़ कर चल देते हैं

वन्दना ने कहा…

दोनों बेटियों की सगाई के लिए बहुत बहुत बधाई आपकी खुशी को समझ सकती हूँ सच मे आपकी खुशी का अहसास ही हमे भी खुश कर रहा है……………दोनो बेटियों को हमारा ढेर सा प्यार और आशीर्वाद्।

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

aap sabhi logon ko meri khushiyon men shamil hone ke liye aur betiyon ko ashish dene ke liye bahut bahut dhanyavad.

संजय भास्कर ने कहा…

दोनों बेटियों की सगाई के लिए बहुत बहुत बधाई।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत बहुत बधाई ..दोनों बेटियों को शुभकामनायें ..और आशीर्वाद ..उनका भविष्य सुखमय और उज्ज्वल हो ..

आपकी खुशी ऐसे ही बरकरार रहे ..

SAJAN.AAWARA ने कहा…

Meri traf se bhi bahno ko sagai ki badhaiyannnnnnnnnn..........
Is sunahre moke par kya de bahno ko uphar,
bus yahi duwa hai khuda se ki acha mile priwaar.

Jai hind jai bharat

sushma 'आहुति' ने कहा…

खुशिया यु मिलती रहे आपको.... बहुत बहुत बधाई....

निर्मला कपिला ने कहा…

दोस्ती हो तो ऐसी। बेटियों की सगायी के लिये बहुत बहुत बधाई।

निर्मला कपिला ने कहा…

दोस्ती हो तो ऐसी। बेटियों की सगायी के लिये बहुत बहुत बधाई।

Surendra shukla" Bhramar"5 ने कहा…

आदरणीया रेखा श्रीवास्तव जी हार्दिक अभिवादन -नमन है आप को और ऐसी माओं को -खुशियाँ सदा आप के परिवार पर बरसती रहें -नहीं तो आज के ज़माने में तो रोज न जाने क्या क्या सुनना पड़ता है ..
बहुत सुन्दर कल्पना की खुशियों की उडान और प्यार आप सपरिवार का यों ही बना रहे -बधाई
बधाई हो
शुक्ल भ्रमर ५
भ्रमर का दर्द और दर्पण

mridula pradhan ने कहा…

aap bahut achchi hain......hamari shubhkamnayen aap ke saath hain.bachchiyan hamesha khush rahen.

Rajiv ने कहा…

दीदी,प्रणाम.
"ख़ुशी मिली इतनी ........." को पढ़कर मन बहुत भावुक हो गया. यह मानवीयता का विरल और अनुकरणीय उदाहरण पेश करता है.रिश्तों का मर्म आपकी ममता बखूबी समझती भी हैं और निभाती भी हैं.चित्रण भी अत्यंत जीवंत है.दोनों बिटिया को स्नेहाशीष.