जियो तो ऐसे - 1
वैसे तो इस धरती पर मानव के रूप में आकर सभी मानव तभी है जब कि उन्हें एक मानव की परिभाषा ज्ञात हो। सब मानव हैं और हम प्राकृतिक तौर पर एक ही जाति के हैं तो ये रिश्ता ही सबसे वृहत एवं घनिष्ठ है।
आइए इसे परिभाषित करने के लिए एक इंसान से मिलते हैं, जो सिर्फ और सिर्फ मानवीयता के लिए ही जिया और फिर उसने उसके बदले तिरस्कार, अपमान और अपयश भी झेला।
रवि किस मिट्टी का बना है, नहीं मालूम, लेकिन उसको यदि किसी ने मुसीबत में आवाज दी तो वह सब तरह से तैयार खड़ा रहा। इसमें घर और बाहर की कोई सीमा उसने नहीं बना रखी थी। परिवार, उससे जुड़े सारे रिश्ते, मित्र और उनके परिवार, पड़ोसी या उनके रिश्तेदार। बस उनको खबर मिली नहीं कि और जो भी उनसे सबसे अच्छा बन पड़ा करने को तैयार रहा।
सिर्फ एक घटना ही रखूंगी। वह अपने काम से एक नर्सिंग होम गया तो वेटिंग एरिया में उनके एक मित्र परेशान टहल रहे थे। रुक गए और पूछा - क्या हुआ ? पता चला कि उनके छोटे भाई की आँतें उलझ गयीं है और तुरंत ऑपरेशन होना है। उसके लिए ब्लड की जरूरत है और वह भी फ्रेश। भाई के दो छोटे बच्चे हैं और पत्नी बेहोश पड़ी थी। मित्र शुगर के मरीज थे नहीं दे सकते थे और उनके सारे रिश्तेदार ब्लड की बात सुनकर धीरे धीरे खिसक लिए। इतनी जल्दी ब्लड मिलना आसान नहीं था। पता चला कि उसके ग्रुप का ब्लड चाहिए था और बिना किसी चिंता के बोला - मेरा यही ग्रुप है, चलो डॉक्टर से कहो कि मेरा ब्लड ले लें और ऑपरेशन की तैयारी करें।
आज मित्र का भाई सपरिवार खुश है लेकिन उसका फ़ोन अक्सर आता रहता है कि आपने मुझे दूसरा जीवन दिया। लेकिन उसने हमेशा यही कहा कि ये खून के सीमित रंग बनाये ही इस लिए गए हैं कि अगर जरूरत हो तो हम इनका मान रखें। खून के रिश्ते वो नहीं जो हमारे परिवार के या फिर घर से जुड़ते हैं। अगर उस दृष्टि से देखें तो सारा विश्व में मनुष्य एक ही तत्त्वों से बना है लेकिन खून का खून से मिलना भी खून का रिश्ता है।
इस दुनिया में सिर्फ एक रवि नहीं बल्कि बहुत सारे रवि हैं, जिन्हें फरिश्ता बना कर भेजा है ईश्वर ने।
रेखा श्रीवास्तव
कानपुर



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