शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

कब बदलेंगे हम ?

                                  अपने जीवन में बहुत सारे लोगों से  हुआ . बहुत से लोगों की गुत्थियों को सुलझाया , दिशा दी या फिर कुछ इस तरह से जीवन में शामिल हो गए कि जैसे वे मेरे बहुत अपने हों लेकिन इस बार कुछ ऐसा हुआ कि लग रहा है शायद एक आत्महत्या को बचा पाना मुश्किल है . कहेंगे हम इसे आत्महत्या लेकिन होगी ये ऑनर किलिंग ?

                                निधि ( काल्पनिक नाम ) मेरी बेटी की सहेली है बचपन से K G  से साथ पढ़ी और आगे जाकर उनकी दिशा तो बदल गयी लेकिन साथ नहीं बदला। जब भी बेटी कानपूर आती है वो जरूर मिलने आती है और सारा दिन एक साथ बीतता है  या फिर बेटी वहां जाती है . कुछ इत्तेफाक ऐसा है कि मेरी बड़ी बेटी की जितनी भी सहेलियां है हम सबके परिवार से जुड़े हैं लेकिन छोटी वाली की सहेलियों से तो जुड़े हैं उनके परिवार से कोई वास्ता नहीं है .  न मैं कभी गयी और न वे लोग कभी आये .
                             वैसे तो बिटिया रानी भी अच्छी काउंसलिंग कर लेती हैं लेकिन इस बार हार  कर मुझसे सलाह ली और मामला कुछ ऐसा निकला कि उनकी मित्र जो नौकरी भी करती है लेकिन वह जिससे शादी करना चाहती है वह उनके क्षेत्र का ही इंसान है लेकिन वह उनके बराबर की सजातीय  नहीं है . उसने इस बारे में अपने घर में बात की और परिणाम ये है कि  हमें कहते हुए शर्म आती है कि पढ़े लिखे उच्च शिक्षित लोग भी ऐसा कर सकते हैं . राजी होने तो दूर की बात उन्होंने बेटी को जिस तरीके से टार्चर कर सकते हैं किया , वह हमेशा चहकने वाली लड़की - खामोश हो चुकी है .  आज के ज़माने में जब की संकीर्णता की बेड़ियाँ टूट रही है हम अब भी वहीँ जी रहे हैं . मुझसे बात नहीं हुई लेकिन उनकी दलील सुनी तो लगा कि क्या कुछ लोगों  की विचारधारा कभी बदल नहीं सकतीहै .     इज्जत के नाम पर खुद अपनी दुनियां उजड़ जाए तो कोई बात नहीं है लेकिन इज्जत रहनी चाहिए . ये क्यों भूल जाते हैं कि  अगर अति संवेदनशील बच्चा अवसाद की स्थिति में कोई आत्मघाती कदम उठा  लेता है तो आप लोगों को क्या उत्तर देंगे ? उनके कितने कटाक्ष सुनेगें ? तब आपकी इज्जत बरक़रार रहेगी शायद नहीं,  आप अपने बच्चे को भी खो देंगे और इज्जत को भी . शादी के बाद कोई पूछने नहीं आता है कि आपकी बेटी कैसी है ? उसके और आपके सुख दुःख में साथ  देने वाले कोई नहीं होंगे आपके अपने बच्चे ही होंगे .
               अगर कल को वह लड़की इतने अवसाद के चलते आत्महत्या कर लेती है तो उनकी इज्जत के लिए कितने  सवाल पैदा होंगे ? ये बात उनकी समझ क्यों नहीं आती है ?
                     मान लीजिये कि उस लड़की ने आपकी इज्जत की दुहाई के लिए कहींऔर शादी कर भी ली और कल 
वह सामंजस्य न बिठा पाई तो आप उसके जीवन को कितने वर्षों तक साथ देंगे ?
            आपने अपनी जिन्दगी अपने अनुकूल जी और अब चाहते हैं कि बच्चे भी अपनी जिन्दगी आपके अनुरूप ही जियें . समझदारी इसी में है कि उनकी जिन्दगी उन्हें जीने दें . वे अब बच्चे नहीं रहे कि  हम उनकी अंगुली पकड़ कर या गाय बकरी की तरह से जहाँ चाहे जिस खूंटे से चाहे बांध दें और वे बंधे रहें .अगर जिद और हालत के चलते बड़ों ने निर्णय न बदला तो कल का इतिहास कुछ भी हो सकता है .  आप लोग भी कुछ राय दें कि हम क्या कर सकते हैं ?

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7 टिप्‍पणियां:

sushma 'आहुति' ने कहा…

sargarbhit post...

कविता रावत ने कहा…

दु:खद है ...ऐसे प्रकरणों में कुछ दिन की बात रहती हैं उसके बाद सब चलता रहता है ..जिन लोगों के पास काम धाम नहीं होता वे ज्यादा इज्ज़त के पीछे पड़े रहते है उन्हें ऐसी बातों में ही मजा आता है .....घर-बिरादरी के लोग उनके लिए कुछ नहीं करने वाले उन्हें जो कुछ करना है खुद ही करना होता है फिर लोग जाने क्यों इतना हंगामा खड़ा कर देते हैं ...
.आप लड़की का माँ बाप को जरुर समझाए कि जात-पात जैसी बातों में न उलझे ...आज के हिसाब से चलने में ही सबकी भलाई है ...आज समाचार पत्रों में आये दिन ऐसे दुखद ख़बरों को सुनकर पढ़कर कुछ तो सबक लें ...

Ranjana Verma ने कहा…

आज के ज़माने में इतनी संकीर्ण सोच....... अच्छी प्रस्तुति !!

Ranjana Verma ने कहा…

आज के ज़माने में इतनी संकीर्ण सोच....... अच्छी प्रस्तुति !!

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

लड़की है न - व्यक्ति होने का अधिकार उसे नहीं मिला है,उसके लिये बोलनेवाला भी शायद ही वहाँ कोई हो !

shorya Malik ने कहा…

सोच को बदलना होगा , बहुत सार्थक ,आभार

यहाँ भी पधारे ,
http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_5.html

रचना दीक्षित ने कहा…

चिड़िया अपने बच्चों को अपनी चोंच से खाना खिलाती है, उसे उड़ना सिखाती है फिर जब वो बच्चे उड़ना सीख जाते हैं तो फिर चिंतामुक्त हो नीलगगन में अपनी उड़ान भरने के लिए छोड़ देती है. सही शिक्षा उचित मार्ग दर्शन उनके बड़े होने तक बस.