शनिवार, 7 मई 2011

माँ तुम्हें प्रणाम !


हमको जन्म देने वाली माँ और फिर जीवनसाथी के साथ मिलने वाली दूसरी माँ दोनों ही सम्मानीय हैं। दोनों
का ही हमारेजीवन में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इस मदर्स डे पर 'अम्मा' नहीं है - पिछली बार मदर्स डे पर उनके कहे बगैर ही ऑफिस जाने से पहले उनकी पसंदीदाडिश बना कर दी तो बोली आज क्या है? शतायु होने कि तरफ उनके बड़ते कदमों ने श्रवण शक्ति छीन ली थी।इशारेसे ही बात कर लेते थे। रोज तो उनको जो नाश्ता बनाया वही दे दिया और चल दिए ऑफिस।
वे अपनी बहुओं के लिए सही अर्थों में माँ बनी। उनके बेटे काफी उम्र में हुए तो आँखों के तारे थे और जब बहुएँ आयींतो वे बेटियाँ हो गयीं। अगर हम उन्हें माँ न कहें तो हमारी कृतघ्नता होगी। वे दोनों बहुओं को बेटी ही मानती थीं।
मैं अपने जीवन की बात करती हूँ। जब मेरी बड़ी बेटी हुई तभी मेरा बी एड में एडमिशन हो गया। मेरा घरऔरकॉलेज में बहुत दूरी थी । ६-८ घंटे लग जाते थे। कुछ दिन तो गयी लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा था। कालेज के
पास घर देखा लेकिन मिलना मुश्किल था। किसी तरह से एक कमरा और बरामदे का घर मिला जिसमें न खिड़कीथी और न रोशनदान लेकिन मरता क्या न करता? मेरी अम्मा ने विश्वविद्यालय की सारी सुख सुविधा वाले घर कोछोड़कर मेरे साथ जाना तय कर लिया क्योंकि बच्ची को कौन देखेगा?
कालेज से लंच में घर आती और जितनी देर में बच्ची का पेट भरती वे कुछ न कुछ बनाकर रखे होती और मेरेसामने रख देती कि तू भी जल्दी से कुछ खाले और फिर दोनों काम साथ साथ करके मैं कॉलेज के लिए भागती।बेटी को सुला कर ही कुछ खाती और कभी कभी तो अगर वह नहीं सोती तो मुझे शाम को ऐसे ही गोद में लिए हुएमिलती . मैं सिर्फ पढ़ाई और बच्ची को देख पाती ।
मैं सिर्फ
पढ़ाई और बच्ची को देख पाती थी । घर की सारी व्यवस्था मेरे कॉलेज से वापस आने के बाद कर लेती थी।मुझे कुछ भी पता नहीं लगता था कि घर में क्या लाना है? क्या करना है? वह समय भी गुजर गया। मेरी छोटी बेटी६ माह की थी जब मैंने आई आई टी में नौकरी शुरू की। ८ घंटे होते थे काम के और इस बीच में इतनी छोटी को bachchi कों कितना मुश्किल होता है एक माँ के लिए शायद आसान हो लेकिन इस उम्र में उनके लिए आसान न था लेकिन कभी कुछ कहा नहीं। ऑफिस के लिए निकलती तो बेटी उन्हें थमा कर और लौटती तो उनकी गोद से लेती।
मैं आज इस दिन जब वो नहीं है फिर भी दिए गए प्यार और मेरे प्रति किये गए त्याग से इस जन्म
में हम उरिण नहीं हो सकते हैं । मेरे सम्पूर्ण श्रद्धा सुमन उन्हें अर्पित हैं।

15 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

maine bhi haath jod rakhe hain

Dr Varsha Singh ने कहा…

remarkable ...touchy...

नरेन्द्र व्यास ने कहा…

दो बार पढ़ गया और दृश्य साकार होकर आँखों के सामने घूम गए. अविस्मर्णीय ! बस नमन करता हूँ !!

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

मैं भी मेरी माँ का स्‍मरण कर रहा हूँ, जो आज हमारे बीच नहीं हैं।
"माँ की ममता कौन भुलाए,
कौन भुला सखता है वो प्यार,
किस तरह बताए माँ के बिना कैसे जी रहए हम"
आपको मदर्स डे की शुभकामनायें!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत हृदयस्पर्शी पोस्ट ...

SAJAN.AAWARA ने कहा…

MAA TUJHE SALAAM. . . JAI HIND JAI BHARAT

निर्मला कपिला ने कहा…

माँ की यादें --- आपने आँखें नम कर दी। उन्हें विनम्र श्रद्धाँजली।

shikha varshney ने कहा…

dil ko chhuti hui post.
happy mothers day.

रचना दीक्षित ने कहा…

अविस्मरणीय.
मातृदिवस की शुभकामनाएँ.

nilesh mathur ने कहा…

मातृदिवस की शुभकामना

राज भाटिय़ा ने कहा…

हृदयस्पर्शी रचना,मां तो मां हे

Patali-The-Village ने कहा…

हृदयस्पर्शी रचना| मातृदिवस की शुभकामनाएँ|

Neelam ने कहा…

main natmastak hoon...Maa ki tasveer aankhon main utar aayi hai, aur aansu bhi..maine do maon ko khoya hai..saasu Maa aur Maa.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

dil ko kahin chhuu gayee...:)

संजय भास्कर ने कहा…

हृदयस्पर्शी मातृदिवस की शुभकामना