गाँव की बात करें तो विश्वास कर भी लिया जाए , लेकिन दिल्ली जैसे शहर में कोई पैदा हो, यहीं पर कार्य कर रहा हो और यह कहे कि वह आज तक ट्रेन में नहीं बैठा। ये कहना मेट्रो तो बहुत बड़ी चीज है।
यह एक ऐसे इंसान से मुलाकात हुई जो ऑटो चलाता है इसमें 18 साल की उम्र से ऑटो चलाना शुरु कर दिया था क्योंकि उसके पिता की मृत्यु हो गई थी और वह सिर्फ आठवीं तक पढ़ पाया था , उसके बाद घर के चलाने के लिए इधर उधर काम करके गुजारा किया क्योंकि तायाजी ने पूरा बिजनेस हड़प लिया था। वयस्क होते ही उसने ऑटो चलानी शुरू कर दी। ऑटो किराये का है, जिसका प्रतिदिन भाड़ा देता है और अपने परिवार को भी चलाता है सबसे दुखद बात तो यह बतलाई कि अपनी बहन की शादी के वक्त उसकी ससुराल वालों ने अचानक दहेज की मांग कर दी और उसके सिर छुपाने की जगह थी जो पिता करके गए थे उसको उसी वक्त में बेचनी पड़ी और बहन की शादी कर दी। फिर अपने छुपाने की जगह बनाने के लिए दोबारा नौबत नहीं आई और वह किराए के मकान में रह रहा है फिर भी उसका अपना यही नियम है कि वह प्रतिदिन भाड़े के अलावा ₹1000 जमा करता है और ₹500 अपने घर के लिए रखता है इसके बाद वह अपनी ऑटो खड़ा कर देता है। अपनी बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहता है, उसका साथ देने के लिए उसकी पत्नी घर में सिलाई का काम करती है। वह कहता है मुझे अपनी जरूरत और भविष्य की सुरक्षा के लिए जितनी जरूरत है मैं 1 दिन में उतना ही काम करता हूँ।
उसके गाड़ी में पेट्रोल ख़त्म होने वाला था, इसे पेट्रोल भरने के लिए पूछा क्योंकि वहां पर लम्बी लाइन लगी थी तो मैंने कहा तब तो मेरे को बहुत देर हो जाएगी और अगर बीच में ही खत्म हो गया तो बोला कर बीच में खत्म हो गया तो मैं आपको देर नहीं करूंगा मैं आपको दूसरे ऑटो पर बिठा कर भेजूँगा और आपसे पैसे भी नहीं लूँगा। यह मेरा उसूल नहीं है कि मैं सवारी को बीच में छोड़ दूँ। मैं अपने काम के प्रति पूरी तरह ईमानदार और बिना लालच के करता हूँ। आप बुजुर्ग हैं और आपकी मजबूरी समझते हुए मैं आपको आपके घर तक छोड़ूँगा चाहे जो हो जाए, हां समय लग सकता है लेकिन मैं घर तक छोड़कर ही आऊँगा।
ऐसे लोग कहाँ मिलते हैं ? वह भी नई उम्र के लड़के तो हवा में उड़ते हैं और ऊँची-ऊँची चाहतों में चाहे उसके पीछे कोई भी आधार न हो और कितने व्यसनों की शिकार होते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में यह पहला इंसान देखा है जो दिल्ली जैसे शहर में पैदा होकर और ट्रेन में ना बैठा हो। न उसमें लालच है और न ही मैं लालच रखना चाहता है।

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