मिसेज सिन्हा ने अपनी सास को ओल्ड एज होम भेज कर राहत की सांस ली थी ओर आज इसी ख़ुशी में पार्टी रखी थी। उसमें अपनी कुछ सहेलियों को बुलाया था। वाकया वहीं का है जो एक जीवन दर्शन को कह रहा है।
'मुझे अपने घर और अपने बेडरूम के अलावा कहीं नीद ही नहीं आती है। जो सुख सुविधाएँ हम अपने लिए जुटते हैं उनके आदी में हो जाते हैं।' मिसिज सिन्हा अपनी मित्र मंडली में बता रही थी।
'ये बात तो सही है, हम औरतों की जिन्दगी तो किचेन ओर बेडरूम के लिए ही बनी होती है , इसलिए ये चीजें सब्से सुख सुविधा पूर्ण होनी चाहिए। ' अब बारी वंदना की थी।
सबको ये बात पता थी कि मिसेज सिन्हा की सास ओल्ड एज होम में रहती हैं क्योंकि अब ससुर रहे नहीं और उस ज़माने के लोगों की तरह से ससुर ने अपनी पत्नी के लिए कुछ भी नहीं सोचा। जो घर खुद बनवाया था वह भी बेटे के नाम था। असमय मृत्यु के बाद उनकी पत्नी बेटे के घर में रहीं। एक दिन अचानक वह घर बहू के लिए छोटा पड़ने लगा। माँ को पेंशन तो मिलती ही थी इसलिए उनको ओल्ड एज होम में डाल दिया गया।
कुछ लोग ऐसे होते हैं कि खुद गलत होने पर भी बहस कर खुद को सच साबित करने में माहिर समझे जाते हैं। ऐसी ही हैं मिसेज सिन्हा। मिसेज गुप्ता जो अभी तक चुपचाप सब सुन रही थी। उनसे रहा नहीं गया ओर वे बोल ही पड़ी - 'मिसेज सिन्हा आपको अपने घर ओर बेडरूम के अलावा नींद नहीं आती कभी आपने सोचा है कि आपकी सास को उस ओल्ड एज होम में कैसे नींद आती होगी? '
'तो उनका घर कब था? वह तो मेरे घर में ही रहती थीं। उन्हें क्या फर्क पड़ता है? '
'ये घर तो तुम्हारे ससुर का बनवाया हुआ था न, ये तो वास्तव में उनका ही है ओर इस पर उनका ही हक है।'
'आप भूल रही हैं मिसेज गुप्ता ये घर मेरे ससुर ने मेरे पति के नाम से ही बनवाया था तो फिर ये सास जी का कैसे हुआ? इस पर तो मेरा ही हक है न।फिर आप मेरे घर के मामले में बोलने वाली होती कौन हैं? मेरी सास मैं उन्हें कहीं भी रखूँ। ' मिसेज सिन्हा के तीखे तेवर सबको बुरे लगे ।
'मिसेज सिन्हा वे मेरी कोई नहीं है लेकिन मानवता के नाते हमारी सहानुभूति उनके साथ है। अभी हमारा समाज इतना आधुनिक नहीं है और जो लोग अपने माता - पिता को ओल्ड एज होम में रखते हैं , उन्हें अपने लिए पहले से ही सीट बुक करा लेनी चाहिए। '
'जबान संभालिये मिसेज गुप्ता , हमारा बेटा ऐसा नहीं है कि कल हमें ओल्ड एज होम में रखे। हम खुद ही उसे घर से बाहर कर देंगे.'
'वही बात मिसेज सिन्हा तब ये ओल्ड एज होम ही बन जायेगा। जहाँ अपने बच्चे न हों ओर बुजुर्ग अकेले रहें चाहे अपना घर हो या फिर किराये का या भुगतान करके रखा जाय ओल्ड एज होम ही कहा जायेगा। '
इतना कह कर मिसेज गुप्ता उठाकर चली गयीं।
शुक्रवार, 12 अगस्त 2011
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11 टिप्पणियां:
कहते हैं ना, एक बाप चार बच्चों को पाल लेता है पर चार बच्चे मिल कर एक बाप को नहीं पाल सकते।
यकीन नहीं होता लेकिन फिर भी ऐसा होता है समाज में ..सोच कर मन बेचैन हो जाता है...
"मैं खुद ओल्ड होम जाने की इच्छा रखूँ, अलग बात है लेकिन कोई भेजे यह तकलीफ़देह है"
बिल्कुल सही कहा ओल्ड एज होम बनाना हमारे ही हाथ है अब ये हम पर है कि हम अपने लिये क्या चाहते हैं ।
बिल्कुल सही कहा ओल्ड एज होम
Sharam aati ye baate sunkar....
Mata pita karte hain hmara palan posan kitni muskilon ke baad,
kyun dukh dete hain phir unko
pta chlega jis din tum ban jaoge baap..
Jai hind jai bharat
kaise kaise log !
एक संवेदनशील मुद्दे को आपने उठाया है.. बढ़िया आलेख
जहाँ अपने बच्चे न हों ओर बुजुर्ग अकेले रहें चाहे अपना घर हो या फिर किराये का या भुगतान करके रखा जाय ओल्ड एज होम ही कहा जायेगा।
-हम्म!!!
सटीक और सार्थक पोस्ट ... माँ बाप बढती उम्र में बोझ समझे जाने लगे हैं ...
स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन की आपको बहुत बहुत शुभकामनायें.
good post
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