गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

फख्र है बेटियों पर!

बेटे और बेटियों के सवाल पर समाज ने हमेशा है प्रश्नचिन्ह खड़े किये हैं। आज भी मैं और मेरा परिवार गाहे बगाहे इस बात पर कटाक्ष सुनते रहते हैं लेकिन ये यथार्थ है कि मेरे संयुक्त परिवार में दो भाइयों के बीच पांच बेटियां हैं। इनके बड़े होने के पहले कोई कहता --
-- कितना कमाओगे कि इन लड़कियों कि शादी कर सकोगे ।
--काश एक लड़का होता तो इन लड़कियों कि शादी में सहारा तो दे सकता।
--जिंदगी गुजर जायेगी इन लड़कियों कि शादी करने में।
-- अभी परेशान नहीं कर किया वे जानती हैं कि बाद में तो परेशान करना ही है।
--मेरे बेटे से बड़ी बेटी शादी कर देना , तुम लोगों को एक बेटा मिल जाएगा और ये मकान और प्लाट उसके नाम कर देना। बाकी लड़कियों कि शादी में तुम्हें सहायता मिल जायेगी।

मेरे पास उन सवालों के कोई जवाब नहीं थे, क्योंकि उस समय अपने बेटियों के भविष्य को मैं खुद नहीं जानती थी। बस उनके लिए जो कर सका किया और आज उनमें से ३ अपने पैरों पर खड़ी हैं।

एक हफ्ते पहले हमें बड़ी बेटी कि शादी बेंगलोर से करनी पड़ी। बड़ी दो बेटियां वही नौकरी कर रही हैं। बेटे कि कमी शायद हमें कभी खली भी नहीं और इस काम को सारे इंतजाम के साथ जिस खूबसूरती से मेरी दूसरे और तीसरे नंबर कि बेटी ने अंजाम दिया है कि हम चारों के लिए बड़े ही फख्र की बात है। हम नहीं जानते थे कि कहाँ क्या इंतजाम हो सकता है, लेकिन सब कुछ शादी जैसे बड़े काम को अंजाम देने के लिए पिन से लेकर सारे इंतजाम करके मेरी बेटियों ने ये साबित कर दिया कि बेटे को सहारा कहने वाले गलत होते हैं। ये काम तो कोई भी जिम्मेदार संतान कर सकती है।
हम वहाँ थे और सब मूक दर्शक कि तरह ही उनके कार्यों को देखते रहे। कुछ करने के लिए कहा तो आप बस देखते रहिये और जरूरत बतलाइए सारा कुछ हो जाएगा। परसों जब बेटी कि विदाई करके घर लौटे तो लगा कि क्यों ये समाज बेटियों को आज भी बोझ समझता रहता है।

ऐसी बेटियां तो माँ-बाप के लिए गौरव का विषय होती हैं और मुझे इस बात पर नाज है।

3 टिप्‍पणियां:

rashmi ravija ने कहा…

रेखा दी,
दिल गर्व से भर गया ये सब सुन....पता नहीं कौन सी दुनिया में जी रहें हैं वे लोग...हमें भी नाज़ है,अपनी बेटियों पर जिन्होंने आपलोगों को मूकदर्शक बना दिया और सारा भार अपने कन्धों पर ले लिया....कोई भी बेटा ,दूसरा और क्या कर लेता?
और बेटियों के साथ एक अच्छी बात और होती है...वे सारे काम भी करती हैं...और सदाबहार मुस्कान भी खिली रहती है,उनके चेहरों पर...माँ-पिता को भी पूरा सम्मान देती हैं जबकि अक्सर देखा है....बेटे ऐसा दिखाते हैं...जैसे पहाड़ तोड़ रहें हों....और बात बे बात पे अपने से बड़ों को झिड़क भी देते हैं...छोटो को तो डांटते ही रहते हैं...आप बहुत खुशनसीब हैं...जो लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में बेटियों ने अवतार लिया है,आपके घर

वाणी गीत ने कहा…

बेटी किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं ...मेरी भी दो बेटिया हैं और मुझे उन पर बहुत गर्व है ...अपने आस पास मैं ऐसे बहुत से परिवारों को देखती हु जहाँ सिर्फ बेटियां ही हैं हालांकी जब तब लोगों की जबरदस्ती की सहानुभूति और सलाहों का सामना करना पड़ जाता है ...मगर मैं इसकी परवाह नहीं करती और जानती हूँ कि वे अपना एक सुरक्षित भविष्य बनाने में सक्षम होंगी ..और फिर आप लोग भी आशीर्वाद देंगी ही ....

vishal ने कहा…

आज किसी भी क्षेत्र में लड़कों से पीछे नहीं हैं लड़कियाँ। बेटियाँ घर की रौनक हैं, दिल का सुकून हैं और आगे जाकर माँ कौन बनता है आखिर। ईश्वर सभी जगह नहीं हो सकता इसी‍लिए माँ बनी है। बेटियों को कभी भी उपेक्षित मत समझो।